Sagar-बीमा कंपनी की मनमानी पड़ी भारी! क्लेम खारिज करने पर उपभोक्ता फोरम ने लगाया जुर्माना
सागर के जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग ने हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों के लिए एक बड़ा संदेश देने वाला फैसला सुनाया है। पेट दर्द के इलाज के बाद एक मरीज का बीमा क्लेम यह कहकर खारिज कर दिया गया कि उसका इलाज ओपीडी में भी संभव था। लेकिन अब उपभोक्ता फोरम ने बीमा कंपनी को क्लेम की पूरी राशि ब्याज सहित चुकाने और अतिरिक्त मुआवजा देने के आदेश दिए हैं। मामला मोतीनगर निवासी 53 वर्षीय सुनील कुमार जैन से जुड़ा है। उन्होंने अपने परिवार के लिए करीब 31 हजार 846 रुपए प्रीमियम जमा कर स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी ली थी, जो दिसंबर 2023 से दिसंबर 2025 तक के लिए वैध थी।
9 दिसंबर 2024 को सुनील जैन को अचानक पेट दर्द और संक्रमण की शिकायत हुई। डॉक्टर की सलाह पर उन्हें एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां दो दिन के इलाज के बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई। इस दौरान उनके इलाज पर कुल 17 हजार 122 रुपए का खर्च आया। इलाज के बाद उन्होंने सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ बीमा कंपनी में क्लेम प्रस्तुत किया, लेकिन कंपनी ने यह कहते हुए दावा खारिज कर दिया कि मरीज को अस्पताल में भर्ती करने की आवश्यकता नहीं थी और इलाज ओपीडी में भी किया जा सकता था। बीमा कंपनी के इस फैसले से परेशान होकर सुनील जैन ने जिला उपभोक्ता फोरम का दरवाजा खटखटाया।
सुनवाई के दौरान परिवादी के अधिवक्ता ने इलाज से जुड़े सभी दस्तावेज आयोग के सामने प्रस्तुत किए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आयोग ने बीमा कंपनी के तर्कों को खारिज कर दिया। उपभोक्ता फोरम ने आदेश दिया कि बीमा कंपनी 17 हजार 122 रुपए की क्लेम राशि 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित अदा करे। इसके अलावा मानसिक क्षति के लिए 8 हजार रुपए और परिवाद व्यय के लिए 2 हजार रुपए का भुगतान भी दो महीने के भीतर करना होगा। यह फैसला उन लाखों बीमा धारकों के लिए राहत भरी खबर है, जिन्हें अक्सर तकनीकी कारणों का हवाला देकर क्लेम से वंचित कर दिया जाता है। उपभोक्ता फोरम का यह आदेश साफ संदेश देता है कि ग्राहकों के साथ मनमानी करने वाली कंपनियों को जवाब देना होगा।