Sagar-मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के जाते ही खाली हुए जनकल्याण शिविर के स्टॉल, जनता करती रही इंतजार
सागर जिले के राहतगढ़ में आयोजित तीन दिवसीय जनकल्याण शिविर में उस समय सवाल खड़े हो गए, जब कैबिनेट मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के कार्यक्रम समाप्त होते ही अधिकांश विभागों के कर्मचारी अपने स्टॉल छोड़कर गायब हो गए। इधर, अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे लोग अधिकारियों का इंतजार करते रहे। सुरखी विधानसभा के राहतगढ़ जनपद पंचायत परिसर में आयोजित इस तीन दिवसीय खंड स्तरीय जनकल्याण शिविर में प्रदेश के कैबिनेट मंत्री गोविंद सिंह राजपूत शामिल हुए।
उन्होंने विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का निरीक्षण किया, अधिकारियों से जानकारी ली और मंच से सरकार की जनहितकारी योजनाओं की जानकारी देते हुए हितग्राहियों को प्रमाण-पत्र भी वितरित किए। अपने संबोधन में मंत्री ने कहा कि शिविर का उद्देश्य लोगों को सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने से बचाना और उनकी समस्याओं का मौके पर ही समाधान करना है, ताकि अंतिम व्यक्ति तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुंच सके।
लेकिन जैसे ही मंत्री का काफिला जनपद परिसर से रवाना हुआ, वैसे ही शिविर की तस्वीर बदल गई। आरोप है कि शाम करीब 4 बजकर 25 मिनट पर अधिकांश विभागों के कर्मचारी अपने-अपने काउंटर छोड़कर चले गए। कई स्टॉल पूरी तरह खाली नजर आए, जबकि दूर-दराज से आए नागरिक अपनी समस्याओं के निराकरण के लिए भटकते रहे। गौरतलब है कि इस शिविर में 22 विभागों के समस्या निवारण काउंटर लगाए गए हैं।
प्रशासनिक आंकड़ों के मुताबिक, शिविर के दूसरे दिन तक कुल 928 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 467 आवेदनों का निराकरण किया जा चुका है। अब सवाल यह है कि क्या जनकल्याण शिविर सिर्फ वीआईपी दौरे तक ही सीमित हैं? अगर जनता की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता है, तो मंत्री के जाते ही अधिकारी और कर्मचारी अपने कर्तव्य से दूर क्यों हो जाते हैं? यह सवाल अब प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा कर रहा है।