दलित का घोड़ी पर बैठना गुनाह हो गया ? राज फिरते समय बनी विवादित स्थिति, पुलिस के साये में निकले !
क्या दलित होना गुनाह है या फिर घोड़ी पर बैठना गुनाह है आज जब हम 21 वी सदी में जी रहे हैं। दुनिया चाँद तारों पर पहुंच गयी है। इतनी तरक्की हो गयी है। लेकिन आज भी लोगों की मानसिकता नहीं बदली। जहां दलित का घोड़ी पर बैठना दबंगों को रास नहीं आ रहा। ये आरोप खुद हम नहीं लगा रहे बल्कि ऐसा ही मामला फिर एक बार सामने आया है। जहां दलित दूल्हे के घोड़ी चढ़ने पर विवाद हो गया। मामला इतना बढ़ गया की पुलिस को पहुंचना पड़ा और पुलिस की मौजूदगी में दूल्हा निकल सका। मामला छतरपुर जिले के ईशानगर थाना क्षेत्र से सामने आया है। जहां बोंड़ा गांव में दलित दूल्हे की घोड़ी पर बैठकर राज निकाली जा रही थी। लेकिन इसी दौरान अचानक विवाद की स्थिति बन गयी। सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और कमान संभाली।
बताया जा रहा है की बोंड़ा गांव निवासी अजय अहिरवार की शादी टीकमगढ़ जिले के कुंअरपुरा गांव में तय हुई थी। शादी की पारंपरिक रस्मों के तहत बीते शुक्रवार को अजय घोड़े पर सवार होकर गांव के देवस्थलों पर आशीर्वाद लेने निकला। तभी गांव के कुछ लोगों ने उसके घोड़ी पर बैठने का विरोध जताया। जिससे तनाव की स्थिति बन गई। जिसके बाद उसके परिजनों ने तत्काल डायल 112 को सूचना दी। जिसके बाद पुलिस बल मौके पर पहुंचा और दोनों पक्षों को समझाइश देकर मामला शांत कराया। इसके बाद पुलिस की निगरानी में ही राज गांव में निकाली गयी। जिससे किसी तरह की अप्रिय घटना नहीं हुई।
मामले में दूल्हे के पिता उमराव अहिरवार का कहना था बेटे की शादी की राज फिरवाना गांव के ही कुछ लोगों को नागवार गुजरा। वह सिर्फ इतना चाहते हैं की आगे कोई परेशानी न हो।
वहीं पुलिस ने बताया की सूचना पर तत्काल टीम पहुंची थी। किसी पक्ष की ओर से शिकायत की जाती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।------