विधायक कंचन तनवे बनीं मिसाल! विधानसभा की जिम्मेदारी के साथ अब दे रहीं MSW की परीक्षा | SAGAR TV NEWS
क्या पढ़ाई की कोई उम्र होती है? क्या जिम्मेदारियों के बोझ के बाद सपनों को फिर से जिया जा सकता है? खंडवा से सामने आई एक कहानी इन सवालों का बेहद प्रेरणादायक जवाब देती है। खंडवा विधायक श्रीमती कंचन मुकेश तनवे ने एक ऐसी मिसाल पेश की है, जो न केवल विद्यार्थियों बल्कि पूरे समाज को नई सोच और नई दिशा देने का काम कर रही है। प्रधानमंत्री एक्सीलेंस ऑफ श्री नीलकंठेश्वर महाविद्यालय में विधायक कंचन तनवे एमएसडब्ल्यू यानी मास्टर ऑफ सोशल वर्क प्रथम वर्ष की परीक्षा देने पहुंचीं और परीक्षा कक्ष में बैठकर यह संदेश दिया कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती।
जनप्रतिनिधि होने के नाते जहां एक तरफ उनके कंधों पर विधानसभा क्षेत्र की जिम्मेदारियां हैं, वहीं दूसरी तरफ उन्होंने अपनी शिक्षा को भी बराबर महत्व दिया है। यह सफर आसान नहीं था। कंचन तनवे ने विवाह से पहले अपने गृह ग्राम पालसूद माल में आठवीं तक पढ़ाई की थी, लेकिन शादी के बाद उनकी शिक्षा बीच में रुक गई। हालांकि परिवार और पति के सहयोग ने उनके अधूरे सपनों को नई उड़ान दी। उन्होंने एक बार फिर किताबों की ओर कदम बढ़ाए और दसवीं-बारहवीं की परीक्षा पास की। इसके साथ ही उन्होंने जनपद पंचायत पंधाना की अध्यक्ष के रूप में सात वर्षों तक और जिला पंचायत अध्यक्ष के रूप में भी अपनी जिम्मेदारियां निभाईं।
इसके बाद जनता ने उन्हें खंडवा विधानसभा का प्रतिनिधित्व करने का अवसर दिया। व्यस्त राजनीतिक जीवन के बावजूद उन्होंने बीएसडब्ल्यू की पढ़ाई पूरी की और अब एमएसडब्ल्यू की पढ़ाई कर रही हैं। विधायक कंचन तनवे ने युवाओं और खासतौर पर महिलाओं से अपील करते हुए कहा कि अगर किसी कारण पढ़ाई अधूरी रह गई है, तो उसे दोबारा शुरू कर जरूर पूरा करें। एक विधायक का परीक्षा कक्ष तक पहुंचना सिर्फ एक तस्वीर नहीं, बल्कि यह संदेश है कि सपनों की कोई उम्र नहीं होती और सीखना कभी नहीं रुकना चाहिए।