Sagar-हाई-रिस्क इंजेक्शन के बाद मरीज की मौ त,BMC में बड़ा सवाल! लापरवाही के आरोपों से मचा हड़कंप
सागर के बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज यानी बीएमसी से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने अस्पताल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बायोप्सी की तैयारी के दौरान मरीज को दिए गए एक हाई-रिस्क इंजेक्शन के बाद उसकी हालत अचानक बिगड़ गई और 11 दिनों तक जिंदगी और मौत से संघर्ष करने के बाद मरीज ने दम तोड़ दिया।
अब परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और स्टाफ पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। जानकारी के अनुसार देवेंद्र पाठक नाम के मरीज को गले में गांठ की शिकायत के बाद 10 जून को बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज के ईएनटी वार्ड में भर्ती कराया गया था। जांच के बाद डॉक्टरों ने बायोप्सी करने का निर्णय लिया। परिजनों का आरोप है कि प्रक्रिया से पहले अस्पताल स्टाफ ने उनसे एट्राक्यूरियम बेसीलेट नाम का इंजेक्शन मंगवाया।
आरोप है कि ड्यूटी पर मौजूद नर्स ने एनेस्थीसिया विशेषज्ञ की निगरानी के बिना इंजेक्शन लगा दिया। इंजेक्शन लगने के कुछ ही मिनट बाद मरीज की तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी। सांस लेने में परेशानी हुई और कुछ समय बाद हार्टबीट रुक गई। हालत गंभीर होते ही डॉक्टरों की टीम सक्रिय हुई और करीब 45 मिनट तक लगातार सीपीआर दिया गया। लंबे प्रयास के बाद मरीज की धड़कन वापस आई, लेकिन उसकी हालत नाजुक बनी रही। मरीज को वेंटिलेटर और आईसीयू में भर्ती किया गया।
करीब 11 दिनों तक इलाज चलने के बाद 23 जून की सुबह मरीज की मौत हो गई। घटना के बाद परिवार में गहरा आक्रोश है। मृतक की पत्नी ने गोपालगंज थाने में लिखित शिकायत देकर निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। परिजनों ने यह भी आरोप लगाया है कि इंजेक्शन लगाते समय संबंधित नर्स मोबाइल फोन पर व्यस्त थी। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। वहीं अस्पताल प्रबंधन की ओर से भी अब तक कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है... अगर आरोप सही हैं, तो मरीज की जान का जिम्मेदार कौन?