Sagar- रजौआ की महिलाएं पहुंचीं कलेक्ट्रेट, 200 साल से रह रहे, फिर भी नहीं मिला हक !
सागर शहर से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने विकास और सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। मंगलवार को ग्राम रजौआ के टपरा क्षेत्र की महिलाएं अपनी मूलभूत समस्याओं को लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचीं और जनसुनवाई में अधिकारियों के सामने अपनी पीड़ा रखी। करीब 13 से अधिक परिवारों की बड़ी संख्या में महिलाएं कलेक्टर कार्यालय पहुंचीं। उनके हाथों में उम्मीद थी और चेहरे पर वर्षों से चली आ रही समस्याओं के समाधान की आस दिखाई दे रही थी। महिलाओं ने अधिकारियों से आवास पट्टा और पेयजल की समस्या को लेकर गुहार लगाई।
ग्रामीण महिलाओं का कहना है कि उनका परिवार पिछले करीब 200 वर्षों से ग्राम रजौआ के टपरा क्षेत्र में निवास कर रहा है, लेकिन इतने लंबे समय के बाद भी उन्हें भूमि का अधिकार यानी पट्टा नहीं मिल पाया है। महिलाओं ने बताया कि भूमि का पट्टा नहीं होने के कारण वे प्रधानमंत्री आवास योजना सहित कई अन्य शासकीय योजनाओं का लाभ लेने से वंचित रह जाती हैं। उनका कहना है कि कई बार जनप्रतिनिधियों और संबंधित अधिकारियों से मांग की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया।
सिर्फ जमीन ही नहीं, बल्कि पानी की समस्या भी ग्रामीणों के लिए बड़ी परेशानी बनी हुई है। महिलाओं का कहना है कि क्षेत्र में लंबे समय से पेयजल संकट बना हुआ है। कई बार मांग और शिकायतों के बाद भी स्थिति में कोई खास बदलाव नहीं आया। जनसुनवाई में पहुंची महिलाओं ने प्रशासन से मांग की कि जल्द से जल्द भूमि के पट्टे जारी किए जाएं और क्षेत्र में पेयजल की समुचित व्यवस्था की जाए। फिलहाल अधिकारियों ने महिलाओं की शिकायत सुनकर मामले की जांच और उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है। अब सवाल यह है कि क्या वर्षों से इंतजार कर रहे इन परिवारों को उनका अधिकार मिलेगा या फिर आश्वासन की यह कहानी आगे भी जारी रहेगी?