Sagar- जामुन की बंपर पैदावार कैसे है भविष्य के लिए डेंजर अलर्ट? वनस्पति विशेषज्ञ ने उठाया पर्दा
आने वाली विपदा या संकट का आभास सिर्फ जीव-जंतुओ को ही नहीं बल्कि वनस्पति और पेड़ पौधों को भी होता है. ऐसी स्थिति में पेड़-पौधे अपनी संतति को बचाने के लिए फलों की बंपर पैदावार करते हैं. जामुन के पेड़ों पर विगत वर्षों की तुलना में इन दिनों खूब सारे फल आने पर इन दिनों लोगों के बीच ऐसी चर्चा है की जिस साल जामुन में फल जाता एते यही उस साल सूखे के संकट बनते है, पानी की भारी कमी हो जाती यही जस स्तर नीचे चला जाता है, दादी नानी जैसे बुजुर्ग अपने अनुभव के आधार पर इन बातो पर जोर दे रहे है, जिस पर वनस्पति शास्त्र के विशेषज्ञ भी अपनी सहमति जता रहे हैं.
आमतौर पर बारिश के बाद ही पकने वाले जामुन का फल इस बार बारिश होने से पहले ही पक गए हैं. नतीजतन इस साल बाजार में तीन साल की तुलना में अधिक जामुन नजर आ रहे हैं. अचानक बारिश के पहले इनमें फलन होने के साथ बंपर पैदावार से वनस्पति वैज्ञानिक भी चकित हैं.
सागर की गर्ल्स डिग्री कॉलेज में वनस्पति शास्त्र के विशेषज्ञ एम् के मिश्रा और भूपेंद्र अहिरवार बताते है कि जामुन ही नहीं बल्कि फालसा के पेड़ों में भी यह स्थिति देखी जा रही है, जिसे मास्टींग या स्ट्रेस फ्रूटिंग कहा जाता है. इस प्रक्रिया में पेड़ द्वारा खुद को खत्म होने की आशंका के चलते अपनी संतति अथवा प्रजाति को बचाए रखने के लिए सुसाइड फ्रूटिंग करते हैं, जिसे बंपर क्राप भी कहा जाता है.
यह तब होता है जब पेड़ को जमीन के नीचे पानी की भारी कमी महसूस होने लगती है और मौसम में बड़े बदलाव के संकेत मिलते हैं. उस वक्त पेड़ अपने आप ही डिफेंस मोड में चला जाता है. पेड़ को यह आभास होता है कि आने वाले समय में वह जीवित नहीं रह पाएगा, ऐसे में अपनी प्रजाति को पृथ्वी पर बनाए रखने के लिए पेड़ अपनी पूरी ऊर्जा और ताकत से फल पैदा करते हैं. फ्रूटिंग की प्रक्रिया में पौधों में नई पत्तियां और टहनिहया नहीं आती, ऐसा इसलिए होता है क्योंकि पेड़ अपनी ऊर्जा को बचाकर पूरा ध्यान सिर्फ फलों के उत्पादन पर केंद्रित करता है.
प्रकति की इस चेतावनी को देखकर पानी को लेकर डेंजर अलर्ट का अंदाजा लगाया जाने लगा है इधर मौसम विभाग ने भी अलनीनो की वजह से इस साल सामान्य से कम बारिश होने एक अलर्ट दिया है, खासकर मध्यभारत और उत्तर के कुछ राज्यों में इसका असर देखने को मिलेगा