Sagar -छोटे शहर से गोल्डन बूट तक: सागर के प्रांजल ने दिल्ली के मैदानों में गाड़े झंडे
स्कूल के मैदान से शुरू हुआ सफर जब नेशनल लेवल और फिर दिल्ली के बड़े फुटबॉल क्लब्स तक पहुँच जाए, तो कहानी खुद-ब-खुद प्रेरणा बन जाती है। सागर के रहने वाले युवा फुटबॉलर प्रांजल तिवारी ने अपनी लगन से न सिर्फ खेलो इंडिया में अपनी चमक बिखेरी, बल्कि नेशनल लेवल पर दो बार गोल्डन बूट का खिताब भी अपने नाम किया। खेल कोटे की बदौलत आज वे दिल्ली के प्रतिष्ठित हिंदू कॉलेज में पढ़ाई के साथ-साथ प्रोफेशनल फुटबॉल खेल रहे हैं।
प्रांजल बताते हैं कि फुटबॉल से लगाव स्कूल के दिनों में हुआ। ट्रेनिंग अच्छी रही, तो पहले साल ही अंडर-14 नेशनल खेलने का मौका मिल गया। इसके बाद एक साल क्रिश्चियन क्लब के साथ प्रैक्टिस की। महज 14-15 साल की उम्र में मेरा सिलेक्शन अंडर-17 नेशनल के लिए हो गया।
कोविड के दौर में जब खेल रुका, तो प्रांजल रुके नहीं। वे बताते हैं कि सागर में ग्रास-रूट लेवल पर वैसी सुविधाएं नहीं थीं, इसलिए मैं प्रोफेशनल ट्रेनिंग के लिए चंडीगढ़ चला गया। वहां खेल में निखार आया। स्पोर्ट्स कोटे से दिल्ली के हिंदू कॉलेज में एडमिशन मिला, जिससे करियर को नई उड़ान मिली। अब मैं दिल्ली के अलग-अलग क्लब्स के लिए खेल रहा हूं।
प्रांजल के मुताबिक, सागर में पहले लगातार टूर्नामेंट होते थे, जिससे उन्हें आगे बढ़ने का मौका मिला। हालांकि, वे मानते हैं कि बाहर के मुकाबले सागर के ग्राउंड्स को अभी और बेहतर करने की जरूरत है और वहां नियमित समर कैंप होने चाहिए। उन्होंने कहा कि सागर डिस्ट्रिक्ट फुटबॉल एसोसिएशन लगातार खिलाड़ियों को मोटिवेट कर रहा है और मौके दे रहा है। अगर इसी तरह काम चलता रहा, तो सागर से और भी कई नेशनल खिलाड़ी निकलेंगे।