गरीबों की रोजी-रोटी पर संकट,निगम के कर्मचारी मनमानी पर उतारू, 5 महीने बाद भी नहीं मिला जप्त सामान !
आखिर क्यों गरीबों पर ही प्रशासन का डंडा चलता है क्यों आखिर उन्हें बार बार परेशानियों का सामना करना पड़ता है। गरीबों की दुकान का जो सामान पांच महीने पहले जप्त किया गया था वह उन्हें आज तक वापिस नहीं मिल सका है। जिससे छोटे व्यापारियों की रोजी रोटी छिन गयी। हाथ ठेला और फुटपाथ व्यापारी संघ ने नगर निगम परमानमानै के गंभीर आरोप लगाए हैं। मामला उज्जैन जिले का है। जहां निगम की कार्यवाई का मामला गरमाया हुआ है।
हाथ ठेला और फुटपाथ व्यापारी संघ ने निगम प्रशासन पर गंभीर पक्षपात का आरोप लगाते हुए कहा की गरीब पथ विक्रेताओं की आजीविका के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। संजय सिंह चौहान और अर्जुन कहार ने आरोप लगाया की बीते महीनों 2 फरवरी को नगर निगम की गैंग द्वारा जब्त किया गया पथ विक्रेताओं का सामान आज तक वापस नहीं दिया गया। वहीं बीते 1 जुलाई को रामघाट से जप्त किया गया सामान निगम के गैंग प्रभारियों ने आयुक्त के आदेश का हवाला देकर मात्र दो दिनों में ही छोड़ दिया।
संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि 11 पथ विक्रेताओं के पास वैध वेंडिंग प्रमाण पत्र होने के बावजूद उनका 5 से 7 लाख रुपये का सामान निगम ने जप्त कर लिया। पिछले 5 महीनों से पीड़ित व्यापारी न्याय की आस में नगर निगम आयुक्त से लेकर कलेक्टर, संभागायुक्त तक गुहार लगा चुके हैं, लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही। व्यापारियों का आरोप है कि गैंग प्रभारी धीरज श्रीवास्तव, मोहन और बच्चू लाल थनवार अपनी मनमानी पर उतारू हैं उन पर किसी भी उच्च अधिकारी का कोई नियंत्रण नहीं है।
व्यापारी संघ ने तीखा विरोध जताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा संसद में पारित पथ विक्रेता कानून 2014 की निगम कर्मचारी धज्जियां उड़ा रहे हैं। 3 जुलाई को की गई मनमानी कार्रवाई को नियम विरुद्ध बताते हुए संघ ने मांग की है कि सम्बंधित गैंग प्रभारी और उनके कर्मचारियों पर सामान की लूट और चोरी का प्रकरण दर्ज किया जाए। संघ ने उग्र आंदोलन की भी चेतावनी दी।