बाढ़ में फंसी करोड़ों की मशीनें, नर्मदा में अवैध खनन का खेल, NGT की रोक बेअसर!
राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण यानी NGT की सख्त रोक के बावजूद नर्मदा नदी में कथित अवैध रेत खनन का खेल थमता नजर नहीं आ रहा। ताजा मामला तब सामने आया जब अचानक आई बाढ़ में नदी के बीच उतारी गई भारी-भरकम मशीनें और डंपर फंस गए। अब इस घटना ने प्रशासन की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारी के अनुसार, एमपी के सीहोर जिले के नर्मदा नदी में रेत खनन के लिए एक कंपनी द्वारा कथित रूप से नदी की प्राकृतिक धारा के बीच अस्थायी रैंप बनाकर भारी पोकलेन मशीनें और डंपर उतारे गए थे। आरोप है कि इसी रास्ते के जरिए लंबे समय से रेत निकासी का काम चल रहा था।
इसी दौरान ऊपरी क्षेत्रों में हुई तेज बारिश के बाद नर्मदा का जलस्तर अचानक बढ़ गया। तेज बहाव में यह अस्थायी रास्ता पूरी तरह बह गया और नदी के बीच मौजूद करोड़ों रुपये की मशीनें और डंपर बाढ़ के पानी में फंस गए। घटना के वीडियो और तस्वीरें अब तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं। इस पूरे घटनाक्रम के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब NGT द्वारा नदी में इस तरह की गतिविधियों पर स्पष्ट प्रतिबंध है, तब आखिर इतनी बड़ी मशीनें नदी के बीच तक कैसे पहुंचीं? स्थानीय लोग आरोप लगा रहे हैं कि लंबे समय से खुलेआम रेत का उत्खनन होता रहा, लेकिन संबंधित विभागों ने कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि बाढ़ के समय मशीनों पर मजदूर मौजूद होते, तो बड़ा हादसा हो सकता था। साथ ही नदी की प्राकृतिक धारा से छेड़छाड़ पर्यावरण और आसपास के गांवों के लिए भी खतरा बन सकती है। फिलहाल प्रशासन की ओर से इस मामले में विस्तृत कार्रवाई या आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। वहीं, बीच नदी में फंसी मशीनें कई सवाल छोड़ रही हैं। नर्मदा में बाढ़ ने सिर्फ मशीनों को नहीं रोका, बल्कि कथित अवैध खनन की तस्वीर भी उजागर कर दी। अब देखने वाली बात होगी कि प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और क्या पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन के आरोपों की निष्पक्ष जांच होती है, या फिर यह मामला भी समय के साथ ठंडे बस्ते में चला जाएगा।