गांव की हकीकत ने खोली पंचायत की पोल, कागज़ों में विकास, ज़मीन पर बदहाली !
सरकार गांव-गांव विकास के दावे कर रही है, लेकिन एमपी के उज्जैन जिले की नागदा तहसील का ग्राम भड़ला उन दावों पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है। यहां चार साल के पंचायत कार्यकाल के बाद भी ग्रामीणों का आरोप है कि विकास सिर्फ कागज़ों तक सीमित रहा।
सड़क, नाली, स्कूल और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव आज भी गांव की पहचान बना हुआ है। हमारी टीम जब ग्राम भड़ला पहुंची तो ग्रामीणों की भीड़ जुट गई। लोगों ने खुलकर अपनी समस्याएं बताईं। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत में विकास कार्यों के नाम पर राशि तो खर्च दिखाई गई, लेकिन ज़मीन पर उसका असर कहीं दिखाई नहीं देता।
सबसे चिंताजनक स्थिति गांव के शासकीय स्कूल की है। बच्चों को पीने का पानी घर से बोतलों में भरकर लाना पड़ता है। स्कूल में बिजली नहीं है, इसलिए पंखे तक नहीं चल पाते और भीषण गर्मी में बच्चे पढ़ाई करने को मजबूर हैं। बारिश के दिनों में स्कूल की छत टपकती है, जिससे बच्चों को इधर-उधर बैठकर पढ़ाई करनी पड़ती है। जर्जर दरवाजे और टूटता प्लास्टर बच्चों की सुरक्षा पर भी बड़ा खतरा बन चुके हैं। स्कूल के शौचालय बदहाल हैं और इतनी गंदगी है कि बच्चे उनका उपयोग करने से डरते हैं। बैठने के लिए आज भी बच्चों को टाट-पट्टी का सहारा लेना पड़ रहा है।
गांव की तस्वीर भी कुछ अलग नहीं है। कई गलियों में सड़कें टूटी हुई हैं, नालियों का अभाव है और बारिश का पानी सड़कों पर जमा रहता है। ग्रामीणों का आरोप है कि सार्वजनिक शौचालय के लिए राशि स्वीकृत होने के बावजूद निर्माण अधूरा पड़ा है। वहीं श्मशान घाट तक जाने के लिए पक्का रास्ता नहीं है और अंतिम संस्कार स्थल पर छत भी नहीं बनी, जिससे बरसात में लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ती है। ग्रामीणों ने पंचायत के सरपंच और सचिव पर विकास कार्यों में लापरवाही और अनियमितता के आरोप लगाए हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन इस रिपोर्ट का संज्ञान लेकर गांव की बदहाल तस्वीर बदलेगा या फिर विकास सिर्फ फाइलों तक ही सीमित रहेगा?