मोबाइल के चक्कर में चली गई जान ! सूखे कुएं में गैस से युवक की मौत, बचाने उतरा दोस्त भी बेहोश
एक दर्दनाक हादसा सामने आया है, जहां एक मोबाइल फोन निकालने की कोशिश 26 वर्षीय कथावाचक युवक की मौत का कारण बन गई। सूखे कुएं में उतरे युवक की जहरीली गैस की चपेट में आने से दम घुट गया, जबकि उसे बचाने के लिए नीचे उतरा उसका दोस्त भी बेहोश हो गया। घटना के बाद परिजनों ने रेस्क्यू में देरी और संसाधनों की कमी को लेकर प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। घटना गुरुवार सुबह एमपी के मुरैना के रेलवे स्टेशन के पीछे स्थित खाकी की बगिया परिसर की है। जानकारी के अनुसार, कथावाचक शिवकुमार उपाध्याय रोज की तरह पूजा करने पहुंचे थे। इसी दौरान तुलसी के पत्ते तोड़ते समय उनका मोबाइल सूखे कुएं में गिर गया।
मोबाइल निकालने के लिए उन्होंने रस्सी का इंतजाम किया और अपने दोस्त देवेश शर्मा सहित कुछ लोगों को मौके पर बुलाया। चार-पांच लोग रस्सी पकड़कर खड़े रहे और शिवकुमार कुएं में उतरने लगे। लेकिन करीब 15 से 20 फीट नीचे पहुंचते ही जहरीली गैस की चपेट में आने से वे बेहोश हो गए और रस्सी हाथ से छूटते ही कुएं में गिर पड़े। जब काफी देर तक कोई जवाब नहीं मिला, तो दोस्त देवेश शर्मा उन्हें बचाने के लिए कुएं में उतरे। लेकिन वे भी गैस की चपेट में आकर बेहोश हो गए। बाहर मौजूद लोगों ने रस्सी के सहारे उन्हें तुरंत बाहर खींच लिया।
सूचना मिलने पर एसडीईआरएफ की टीम मौके पर पहुंची, लेकिन परिजनों का आरोप है कि टीम के पास गैसयुक्त कुएं में रेस्क्यू के लिए जरूरी उपकरण नहीं थे। करीब दो घंटे बाद शिवकुमार को बाहर निकाला गया, लेकिन जिला अस्पताल में डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद अस्पताल में परिजनों और स्थानीय लोगों ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया।
उनका आरोप है कि यदि समय पर संसाधनों से लैस रेस्क्यू किया जाता, तो शिवकुमार की जान बचाई जा सकती थी। मृतक के दोस्त देवेश शर्मा ने भी बताया कि उन्होंने शिवकुमार को कुएं में उतरने से रोका था, लेकिन वे नहीं माने। फिलहाल पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है। यह हादसा एक बार फिर चेतावनी देता है कि बंद या सूखे कुओं में जहरीली गैस हो सकती है और बिना सुरक्षा उपकरणों के उनमें उतरना जानलेवा साबित हो सकता है।