सागर- ट्रैक्टर लोन में बैंक की बड़ी लापरवाही! पिता की जगह बेटे के नाम कर दिया बीमा, आयोग का फैसला
सागर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग ने बैंक की लापरवाही पर बड़ा फैसला सुनाया है। ट्रैक्टर लोन के साथ कराए गए बीमा में मुख्य ऋणी की जगह बेटे के नाम पॉलिसी जारी करने के मामले में आयोग ने बैंक की सेवा में कमी मानते हुए मृतक किसान के परिवार को 4 लाख 23 हजार रुपये से अधिक की राशि ब्याज सहित देने का आदेश दिया है। मामला केसली निवासी सतीश मिश्रा और उनके दिवंगत पिता मुनीम मिश्रा से जुड़ा है। अधिवक्ता पवन नन्होरिया के अनुसार, मुनीम मिश्रा ने ट्रैक्टर खरीदने के लिए कोटक महिंद्रा बैंक से 4 लाख 59 हजार 500 रुपये का ऋण लिया था। ऋण की सुरक्षा के लिए बैंक के माध्यम से ग्रुप इंश्योरेंस योजना के तहत बीमा कराया गया, जिसके लिए 6,279 रुपये से अधिक का प्रीमियम भी जमा किया गया।
लेकिन यहीं एक बड़ी चूक हो गई। नियमों के अनुसार बीमा पॉलिसी मुख्य ऋणी मुनीम मिश्रा के नाम पर जारी होनी चाहिए थी, जबकि बैंक और बीमा कंपनी ने इसे सह-ऋणी और उनके पुत्र सतीश मिश्रा के नाम पर जारी कर दिया। मई 2023 में मुनीम मिश्रा के निधन के बाद जब परिवार ने बीमा क्लेम किया, तब इस गंभीर त्रुटि का खुलासा हुआ। बैंक ने आयोग के सामने यह तर्क दिया कि मुख्य ऋणी की अधिक उम्र होने के कारण कम उम्र के सह-ऋणी के नाम पर बीमा किया गया था। हालांकि, बैंक इस दावे के समर्थन में कोई नियम, दस्तावेज या लिखित सहमति प्रस्तुत नहीं कर सका।
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग के अध्यक्ष राजेश कुमार कोष्टा और सदस्य अनुभा वर्मा ने बैंक की दलीलों को खारिज करते हुए इसे स्पष्ट रूप से सेवा में कमी माना। आयोग ने बैंक को ऋण की बकाया राशि समायोजित करने के बाद 4 लाख 23 हजार 291 रुपये, 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित भुगतान करने का आदेश दिया है। इसके अलावा मानसिक प्रताड़ना के लिए 20 हजार रुपये मुआवजा, 2 हजार रुपये वाद व्यय तथा ऋण खाता शून्य होने के बाद दो माह के भीतर एनओसी जारी करने के भी निर्देश दिए हैं। यह फैसला बैंकिंग सेवाओं में जवाबदेही और उपभोक्ताओं के अधिकारों को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है।