सागर- सोनम वांगचुक को जबरन हटाए जाने का विरोध, कहा ये संविधान की भावना के विपरीत ! | SAGAR TV NEWS |
लद्दाख के पर्यावरणविद और सामजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक बीते कुछ दिनों से दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनशन कर रहे थे। जिन्हे शनिवार को दिल्ली पुलिस ने जबरन हिरासत में लिया और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया। जिसके बाद अब विरोध तेज हो गया है। लोगों ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया। इसी को लेकर अलग-अलग जगहों पर प्रदर्शन भी हुआ। जिसका सागर जिले में भी असर देखने को मिला। सागर के बंडा में सामाजिक न्याय, लोकतंत्र और संवैधानिक अधिकारों में आस्था रखने वाले नागरिकों ने भीम आर्मी पूर्व विधानसभा अध्यक्ष पुष्पेन्द्र अहिरवार के नेतृत्व में राष्ट्रपति के नाम तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा।
इस दौरान समाजसेवी और अधिवक्ता पुष्पेन्द्र अहिरवार ने कहा की शांतिपूर्ण और अहिंसात्मक जनआंदोलन लोकतंत्र की आत्मा हैं। सोनम वांगचुक को अनशन स्थल से हटाने की पुलिस कार्रवाई लोकतांत्रिक मूल्यों और संविधान की भावना के विपरीत है। उन्होंने कहा की वह अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे थे। लेकिन उन्हें जबरन हटाया गया। अगर कोई नागरिक संविधान के दिए गए अधिकारों के अंतर्गत शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखता है। तो उसके साथ संवाद स्थापित किया जाना चाहिए, न कि दमनात्मक कार्यवाही की जाना चाहिए।
ज्ञापन के माध्यम से राष्ट्रपति से मांग की गई की सोनम वांगचुक द्वारा उठाए गए लद्दाख के पर्यावरण संरक्षण, स्थानीय समुदायों के अधिकारों और लोकतांत्रिक भागीदारी से जुड़े मुद्दों पर भारत सरकार गंभीरतापूर्वक विचार करे। वहीं शांतिपूर्ण आंदोलनकारियों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जाए। इसके अलावा ज्ञापन में राष्ट्रीय शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार, प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने, NEET परीक्षा से संबंधित कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच, दोषियों के विरुद्ध विधि सम्मत कठोर कार्रवाई, शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही स्थापित करने की मांग भी उठाई गई। इस दौरान कई लोगों की मौजूदगी रही।