सागर के प्रसिद्ध कथा वाचक एवं ज्योतिष आचार्य पंडित शोभित शास्त्री जी महाराज अपने साथियों के साथ 14 दिन की अमरनाथ यात्रा करके वापस लौटे हैं सागर से अमरनाथ तक की लगभग 3500 किलोमीटर की इस तीर्थ यात्रा पूरी करने के बाद उन्होंने सागर और बुंदेलखंड के लोगों को अपने अनुभव साझा किए हैं जिसमें उन्होंने बताया कि सागर से अमरनाथ तक किस तरह से यात्रा की जा सकती है और यात्रा के दौरान किन बातों का ध्यान रखना है
शोभित शास्त्री बताते हैं की सबसे पहले सागर से ट्रेन पकड़कर जम्मू तक पहुंचते हैं यहां पर नेटवर्क प्रॉब्लम होने की वजह से लोकल की सिम खरीदनी पड़ती है, यही स्टेशन के पास भगवती नगर में रजिस्ट्रेशन के लिए टोकन मिलते हैं एक व्यक्ति चार आधार कार्ड दिखाकर चार टोकन तक ले सकता है टोकन लेने के लिए सुबह 6:00 बजे से व्यवस्था प्रारंभ होती है रजिस्ट्रेशन होने के बाद यात्रा की तारीख मिलती है, और यात्री बस के माध्यम से करीब 380 किलोमीटर लंबा सफर भारतीय आर्मी की सुरक्षा में कराया जाता है यह पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होती है इसके बाद बाबा की पैदल यात्रा शुरू होती है जिसमें दो रास्ते होते हैं एक बालटाल से होकर गुजरता है और एक पहलगाम से होकर जाता है अगर किसी को यात्रा जल्दी खत्म करनी है तो वह बालटाल वाला मार्ग अपना सकता है लेकिन यह है खड़े पहाड़ों वाला रास्ता होता है जहां बीमार और बुजुर्ग लोग के लिए परेशानी हो सकती है, तो वहीं दूसरा रास्ता पहलगाम से होकर जाता है जो लगभग 35 किलोमीटर लंबा होता है और इस यात्रा के दौरान पांच अलग-अलग बड़े तीर्थ स्थल भी मिलते हैं, इस मार्ग से कश्मीर की घाटियों वादियों बर्फीले पहाड़ नदियाँ यह यू कहें कि स्वर्ग जैसे नजारे मिलते हैं,
इसी रास्ते से पहाड़ पर एक जगह स्वयं प्रकट महाकाली के दर्शन होते हैं ऐसा माना जाता है कि बाबा अमरनाथ के दर्शन करने के बाद उनकी दर्शन करना भी जरूरी होता है तभी यात्रा पूरी मानी जाती है
3 जुलाई से शुरू हुई बाबा बर्फानी की अमरनाथ यात्रा 28 अगस्त तक पूरे 57 दिन तक चलनी है लेकिन ऐसा कहा जा रहा है कि शुरुआती ही कुछ दिनों में बाबा बर्फानी का शिवलिंग पिघल गया है और दर्शन नहीं हो पा रहे जब भी दर्शन कर लौटी तीर्थ यात्री पंडित शोभित शास्त्री महाराज कहते हैं कि जो लोग ईश्वर में विश्वास रखते हैं पूरे मन और आस्था के साथ दर्शन के लिए जा रहे हैं उनके लिए तो बाबा आज भी दर्शन दे रहे हैं लेकिन जो लोग मनोरंजन के हिसाब से पर्यटक स्थल के हिसाब से एंजॉय करने के लिए ब्लॉg बनाने के लिए जा रहे हैं ऐसे लोगों को बाबा के दर्शन नहीं हो पा रहे
उन्होंने बताया कि जिस तारीख में आपकी दर्शन होने हैं उसके एक दिन पहले ही आप अमरनाथ गुफा से कुछ दूरी पर लगाई गई शिविर में रुकने की व्यवस्था होती है रात में 3:00 बजे से सुबह 7:00 तक तीर्थ यात्रियों को दर्शन के लिए छोड़ा जाता है और लाइन लंबी शुरू होती है
इस तीर्थ यात्रा में हर तरह की व्यवस्थाएं भी होती हैं अगर किसी की तबीयत खराब होती है तो उसके लिए दवा का इंतजाम होता है ऑक्सीजन की कमी होती है तो ऑक्सीजन का सिलेंडर मिलता है खाने पीने के लिए सब कुछ फ्री रहता है क्योंकि बड़े-बड़े भंडारे यहां पर चल रहे हैं रुकने के लिए कैंप होते हैं बाबा अमरनाथ की यात्रा एकदम सुविधा हो हो रही है