टाइगर रिजर्व सवालों के घेरे में, तीसरे महीने में तीसरे बाघ की जान गई, सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
महज तीन महीने में तीसरे बाघ की जान चले जाने के बाद अब कई तरह के गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। पार्क प्रबंधन की सुरक्षा और निगरानी प्रणाली सवालों के घेरे में है। फिर इसी तरह का मामला सामने आने के बाद वन विभाग में भी हड़कंप मचा हुआ है। दरअसल हम पन्ना जिले की बात कर रहे हैं। जहां पन्ना टाइगर रिजर्व से दुखद खबर सामने आई है। किशनगढ़ कोर रेंज के तहत बृजपुरा बीट के दुर्गम पहाड़ी इलाके में गश्ती दल को एक वयस्क नर बाघ का की डेड बॉडी संदिग्ध परिस्थितियों में पड़ी मिली। पिछले तीन महीनों में इस टाइगर रिजर्व में बाघ की जान जाने की यह तीसरी बड़ी घटना है। जिसने पार्क प्रबंधन की सुरक्षा और निगरानी प्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
उप संचालक बीरेंद्र कुमार पटेल का कहना है की मृत बाघ के सभी अंग पूरी तरह सुरक्षित हैं। शरीर पर आपसी संघर्ष या चोट के कोई निशान नहीं हैं। प्रथम दृष्टया इसे प्राकृतिक जान जाना माना जा रहा है। इससे पहले गंगऊ में एक बाघ का कंकाल और तारा गांव से रेस्क्यू किए गए रेडियो कॉलर वाले बाघ की जान जा चुकी है। लगातार जा रही इन जानों से टाइगर रिजर्व में हड़कंप मचा हुआ है। फिलहाल वरिष्ठ अधिकारियों और डॉक्टरों की मौजूदगी में बॉडी का पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक जांच के लिए सैंपल इकठ्ठा किए गए। इसके बाद राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के दिशा-निर्देशों और तय नियमों के अनुसार सम्मानपूर्वक बाघ का अंतिम संस्कार किया गया। वहीं बाघ की जान जाने के असली कारणों का खुलासा फॉरेंसिक रिपोर्ट के बाद ही हो सकेगा।----