सागर-उल्दान बांध परियोजना से विस्थापित परिवारों का धरना, मुआवजा और पुनर्वास की मांग | SAGAR TV NEWS
सागर जिले की बंडा तहसील के ग्राम उल्दान के ग्रामीण सोमवार को अपनी विभिन्न मांगों को लेकर कलेक्टर कार्यालय पहुंच गए। बड़ी संख्या में पहुंचे ग्रामीणों ने कार्यालय के मुख्य गेट के बाहर शांतिपूर्ण धरना शुरू कर दिया और उल्दान बांध परियोजना से जुड़े मुआवजा और पुनर्वास के मुद्दों के शीघ्र समाधान की मांग उठाई। ग्रामीणों का कहना है कि उल्दान बांध परियोजना के कारण पूरा गांव विस्थापित हो रहा है, लेकिन कई प्रभावित परिवार अब भी शासन की योजनाओं का पूरा लाभ नहीं पा सके हैं। उनका आरोप है कि सर्वे के दौरान उन महिला-पुरुषों को शामिल नहीं किया गया, जो रोजगार के सिलसिले में बाहर मजदूरी कर रहे थे, वहीं बाहर पढ़ाई कर रहे कई बच्चों का भी सर्वे में नाम नहीं जोड़ा गया। ऐसे परिवारों को भी मुआवजा और पुनर्वास का लाभ दिए जाने की मांग की गई है।
धरने पर बैठे ग्रामीणों ने पुनर्वास के लिए आवंटित किए जा रहे प्लॉटों के आकार पर भी आपत्ति जताई। उनका कहना है कि वर्तमान में दिए जा रहे प्लॉट इतने छोटे हैं कि उनमें परिवार के रहने के साथ-साथ पशुओं के लिए बाड़ा और भूसा रखने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं हो सकती। ग्रामीणों ने मांग की कि प्लॉट का आकार बढ़ाया जाए और पशुपालकों के लिए अलग से भूमि उपलब्ध कराई जाए। इसके अलावा ग्रामीणों ने वर्तमान बाजार मूल्य के अनुसार मुआवजा राशि बढ़ाने की मांग भी प्रशासन के सामने रखी। उनका कहना है कि मौजूदा मुआवजा राशि से नई जगह पर जमीन या मकान खरीदना संभव नहीं है, इसलिए पुनर्मूल्यांकन कर उचित मुआवजा दिया जाए।
धरने की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों से चर्चा कर उन्हें समझाने का प्रयास किया। हालांकि खबर लिखे जाने तक कोई अंतिम सहमति नहीं बन सकी थी और ग्रामीण कलेक्टर कार्यालय के बाहर धरने पर डटे रहे। ग्रामीणों ने साफ कहा है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका शांतिपूर्ण और अनिश्चितकालीन धरना जारी रहेगा। अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन की आगामी कार्रवाई और निर्णय पर टिकी हैं।