96 वनकर्मियों की पदोन्नति के एक हफ्ते बाद आदेश निरस्त, कर्मचारियों के विरोध पर कमेटी गठित
पहले तकरीबन 100 वन कर्मियों को पदोन्नति दे दी गयी। और महज एक हफ्ते बाद आदेश को निरस्त कर दिया गया। जिससे कर्मचारी अपने आपको ठगा सा महसूस कर रहे हैं। इसी को लेकर चार जिलों के वनकर्मी एक साथ जुटे जिनमें जमकर आक्रोश देखने को मिला। आरोप लगाया गया की अपात्र लोगों को शामिल किया गया। ये पूरा मामला एमपी के खंडवा जिले का है। जहां कर्मचारियों के विरोध पर CCF ने जांच कमेटी का गठन किया है।
बताया गया की खंडवा स्थित सीसीएफ कार्यालय में निमाड़ के चारों जिलों के बड़ी संख्या में वन कर्मचारी जमा हुए। खंडवा, बुरहानपुर, सेंधवा, बडवाह और बड़वानी डिवीजन से आये वनकर्मियों में हाल ही में जारी हुई पदोन्नति लिस्ट को लेकर आक्रोश था। ऐसा आरोप है की इस सूची में इसके पहले जारी हुई एक अन्य सूची के 96 वनकर्मियों के नाम काट दिये गए। उनकी जगह अपात्र लोगों को शामिल किया गया। जिससे ये सभी पदोन्नति मिलने के मात्र 7 दिन बाद ही खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। कर्मचारियों की मांग पर जारी हुई पदोन्नति लिस्ट को संशोधन के लिए फिलहाल लिपिकीय गलती मानते हुए निरस्त कर दिया गया है ।
वन कर्मचारी संघ जिलाध्यक्ष अमित मिश्रा का कहना है की कल शाम वनपाल और वनरक्षक की पदोन्नति सूची जारी हुई। जिसमें वरीयता सूची के हिसाब से पात्र कर्मचारियों को नीचे कर बगैर पात्र लोगों को ऊपर स्थान दिया गया । इसके पहले भी जारी हुई सूची में 90 से ज्यादा कर्मचारियों को शामिल कर उसे निरस्त कर दिया गया। वह कर्मचारी परेशान हैं जो पहले सूची में थे लेकिन अब नहीं है। इसका निराकरण न होने तक पद से कर्मचारियों की भारमुक्ति ना करते हुए स्टार सेरेमनी को रोका जाए। इसमें कुल 96 वनरक्षक और वनपाल पद के कर्मचारी प्रभावित हो रहे हैं।
मुख्य वन संरक्षक बासु कनौजिया का कहना है की कुछ आदेश संशोधन के लिए वापस लिए हैं। जिसको लेकर स्टाफ के कुछ लोग अपना आवेदन लेकर चर्चा करने आए थे वह नियम में भी है। उनका आवेदन पुनर्विचार के लिए रखा है। जारी आदेश को लेकर कहा की उसका कुछ क्राइटेरिया था जिसके चलते भर्ती के आदेश दिए गए थे। लेकिन उसमें कुछ लिपिकीय त्रुटि की वजह से पात्र लोग नीचे रह गए, दूसरे कुछ लोग लिस्ट में ऊपर आ गए। सुधार करते हुए आदेश को निरस्त कर पुनः विचार किया जा रहा है।-