स्वास्थ्य सुविधाओं ने फिर किया शर्मसार, अस्पताल में लिफ्ट के पास हुई डिलेवरी,समय पर नहीं मिला इलाज !
गर्भवती महिला दर्द से कराह रही थी। परिजन निजी वाहन से उसे लेकर अस्पताल तो पहुंच गए। लेकिन समय पर इलाज न मिलने से महिला ने लिफ्ट के पास ही बच्चे को जन्म दे दिया। जज्जा बच्चा ज़रूर स्वस्थ हैं लेकिन शर्मसार करने वाले मामले में फिर स्वास्थ्य सुविधाओं पर गंभीर सवाल खड़े किये हैं। स्वास्थ्य सुविधाओं को कलंकित करने का मामला छतरपुर जिला अस्पताल से सामने आया है। महिला को राजनगर थाना क्षेत्र के प्रतापपुरा गांव से लाया गया था।
स्वास्थ्य सुविधाओं के क्या हाल हैं ये तो किसी से छिपे नहीं हैं। अब ताजा मामले ने और भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक प्रसूता को जिला अस्पताल की लिफ्ट के पास गैलरी में ही बच्चे को जन्म देना पड़ा। क्योंकि अस्पताल पहुंचने के बाद परिजनों को यहां-वहां भटकना पड़ा। आरोप है की किसी ने मदद नहीं की। लिहाजा समय पर इलाज नहीं मिला और वार्ड में पहुंचने से पहले ही महिला की डिलेवरी हो गयी।
आरोप है की राजनगर थाना क्षेत्र के प्रतापपुरा गांव से एक महिला को प्रसव पीड़ा होने के बाद अस्पताल में समय पर इलाज नहीं मिला। स्टाफ की लापरवाही की वजह से महिला ने अस्पताल की लिफ्ट के पास स्थित गैलरी में ही बच्चे को जन्म दिया।
परिजनों के मुताबिक वे प्रसूता को निजी वाहन से जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। करीब 10 से 15 मिनट तक डॉक्टर, नर्स और अन्य कर्मचारियों की तलाश में भटकते रहे। लेकिन किसी ने भी कोई मदद नहीं की। आरोप लगाया गया की प्रसूता की गंभीर हालत के बावजूद उसे तत्काल बेड उपलब्ध नहीं कराया गया। जिससे वह महिला को खुद ही लेकर जा रहे थे।
महिला दर्द से कराह रही थी। लिफ्ट के पास पहुंचने के दौरान गैलरी में उसकी डिलीवरी हो गई। घटना के बाद परिजनों ने अस्पताल परिसर में हंगामा करते हुए अस्पताल प्रबंधन और स्टाफ पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए। साथ ही दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। प्रसव के बाद जच्चा-बच्चा को भर्ती कर इलाज शुरू किया गया।
सिविल सर्जन शरद चौरसिया का कहना है की ग्राउंड फ्लोर पर प्रसव कराने की सुविधा नहीं है। इसलिए प्रसूता को ऊपरी वार्ड तक ले जाना पड़ता है। जल्द ही इस व्यवस्था को सुधारा जाएगा।------