सिस्टम का नाकारापन, 108 एम्बुलेंस में ऑक्सीजन ख़त्म, झटपटाता रहा युवक और उखड़ गई सांसें
ये चीखें ये दहाड़ उस माँ की हैं जिसने अपनी आँखों के सामने अपनी औलाद को मरते हुए देखा। ये दर्द ये बेबसी उस बाप की है जिसने अपनी जान झोंक दी लेकिन अपने बेटे को नहीं बचा पाया। ये शर्मनाक तस्वीर उस सिस्टम की है जिसकी लापरवाही से एक नौजवान की जान चली गई। घटना एमपी के मंडला जिले की है। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि एम्बुलेंस में ऑक्सीजन ख़त्म हो गई युवक तड़पता रहा, झटपटाता रहा। माँ-बाप इस आस में थे की किसी तरह अस्पताल पहुंच जाएं, लेकिन इस नाकारा सिस्टम ने उसकी जान ले ली।
ये वीडियो उसी एम्बुलेंस का है जिसमें ऑक्सीजन ख़त्म हो गई थी। देखा जा सकता है की युवक किस परिस्थिति में है। माँ-बाप बेबस हैं। परिजनों का आरोप है की बेटे को समय पर ऑक्सीजन नहीं मिली। और उसने दम तोड़ दिया। तस्वीरें देखकर आपको भी गुस्सा आएगा। लाचार और बीमार सिस्टम पर तरस आएगा।
मंडला जिले से सामने आये इस मामले ने फिर स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 21 साल के किडनी मरीज की जान जाने के बाद जिम्मेदार अधिकारी कार्यवाई की बात कर रहे हैं।
बताया गया की मंडला जिले के सुनहरा माल निवासी 21 साल का अजीत बरया लंबे समय से किडनी की बीमारी से जूझ रहा था। उसका जिला अस्पताल में नियमित डायलिसिस होता था। परिजनों का आरोप है कि तबीयत बिगड़ने पर उन्होंने अस्पताल प्रबंधन से डायलिसिस का समय बदलने का अनुरोध किया। लेकिन इस पर ध्यान नहीं दिया गया। इसके बाद 108 एंबुलेंस सेवा को ऑक्सीजन युक्त एंबुलेंस के लिए सूचना दी गई।
आरोप है की एम्बुलेंस एक घंटे बाद पहुंची। मौजूद कर्मचारी ने डॉक्टर की अनुमति न होने का हवाला देकर ऑक्सीजन लगाने से इनकार कर दिया। मरीज को अस्पताल न ले जाकर बम्हनी स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। जहां डॉक्टर ने तत्काल ऑक्सीजन लगाने और मंडला जिला अस्पताल रेफर करने निर्देश दिए। कुछ दूर चलने पर एंबुलेंस का ऑक्सीजन सिलेंडर खाली हो गया।
जिससे अजीत की हालत बिगड़ने लगी। जिला अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसकी सांसें भी थम गई। परिजनों ने कई गंभीर आरोप लगाए। मामले में CMHO डॉक्टर डी. जे मोहंती का कहना है की जांच गठित की गई थी। रिपोर्ट आ गई है उस आधार पर कारवाई की जाएगी।