Sagar- 186वीं तिसाला बड़ी रथ यात्रा में उमड़ा आस्था का सैलाब, जयकारों से गूंजा शहर, हजारों श्रद्धालु हुए शामिल
सागर शहर की ऐतिहासिक और धार्मिक पहचान मानी जाने वाली 186वीं तिसाला बड़ी रथ यात्रा शुक्रवार को पूरे श्रद्धा, उत्साह और भव्यता के साथ निकाली गई। भीतर बाजार से दोपहर 3 बजे शुरू हुई इस ऐतिहासिक यात्रा में हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। हर दो वर्ष में आयोजित होने वाली इस रथ यात्रा को देखने के लिए शहर ही नहीं, आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। पूरे मार्ग पर माता रानी के जयकारों से माहौल भक्तिमय बना रहा।
आयोजक एवं समिति सदस्य विकास राहुल केसरवानी ने बताया कि इस पारंपरिक आयोजन की तैयारियां करीब दस दिन पहले ही शुरू हो जाती हैं। परंपरा के अनुसार शहर के सभी प्रमुख नाकों पर धार्मिक विधि से धार छोड़कर नाकाबंदी की जाती है। इसके बाद गुजिया बनाकर माता रानी को भोग अर्पित किया जाता है और रात्रि जागरण का आयोजन होता है। रथ यात्रा से पहले भीतर बाजार के लोगों द्वारा सदियों पुरानी "बाजार लूटने" की परंपरा भी निभाई जाती है। इसके बाद विधि-विधान से हवन-पूजन कर यात्रा का शुभारंभ किया जाता है।
जैसे ही माता रानी का भव्य रथ निकला, श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। मान्यता है कि इस रथ यात्रा में शामिल होकर नींबू और नारियल से उतारा करवाने पर भूत-प्रेत बाधाओं और अन्य कष्टों से मुक्ति मिलती है। इसी आस्था के साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने माता के दर्शन कर सुख, समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना की। यात्रा के दौरान विभिन्न अखाड़ों ने अपने हैरतअंगेज करतब दिखाए। शेर नृत्य, पारंपरिक झांकियां और नन्हीं बालिकाओं के डमरू दल की आकर्षक प्रस्तुति ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। पूरे मार्ग पर जगह-जगह सामाजिक और धार्मिक संगठनों ने स्वागत मंच लगाए, जहां श्रद्धालुओं को पेयजल और प्रसादी वितरित की गई।
रथ यात्रा को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे। श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह के साथ माता रानी के रथ को खींचा और जयकारों के बीच इस ऐतिहासिक धार्मिक परंपरा को आगे बढ़ाया। आस्था, संस्कृति और सामाजिक एकता का यह भव्य आयोजन एक बार फिर शहर की धार्मिक विरासत का साक्षी बना।