Sagar- यामिनी मौर्य ने कॉमनवेल्थ में रचा इतिहास, सिल्वर मेडल जीतकर सागर का नाम रोशन किया
ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में मध्य प्रदेश के सागर की एक बेटी ने जूडो में रजत पदक जीतकर इतिहास रच दिया है। मेडल जीतने के बाद से ही यामिनी के परिवार में खुशी का माहौल है। उनके घर पर रिश्तेदार पहुंच रहे हैं फोन पर बधाइयां में रही है नेताओं अधिकारियों के द्वारा पिता को फोन लगाकर बेटी की उपलब्धि पर शुभकामनाएं दी जा रही हैं. यामिनी के पिता हरिओम मौर्य ने बताया कि जब हम लोग टीवी पर यह गेम देख रहे थे तो आंखों में खुशी के आंसू आ गए थे उन्होंने बताया कि अपने जीवन में खूब संघर्ष किया है चाहे आर्थिक रूप से हो या फिर अन्य तरीके का लेकिन मध्य प्रदेश सरकार का और कोच का हमेशा सपोर्ट मिला
मेडल जीतने वाली यामिनी मौर्य की मां मिथिलेश मौर्य ने कहा कि हमारी बेटी ने सागर से ही इस खेल की शुरुआत की थी कोच ने कहा था कि वह गेम में आगे बढ़ेगी तो सागर से भोपाल भोपाल से पटियाला और फिर कर्नाटक में प्रशिक्षण लेती रही जहां पर भी खेलने के लिए जाती थी तो गोल्ड मेडल लेकर आई थी कल भी हम लोग देख रहे थे तो आंसू भी आ रहे थे और खुशी भी हो रही थी बेटी ने हम लोगों का नाम रोशन किया है
बता दें कि सागर की पुरानी सदर निवासी यामिनी मौर्य ने 57 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीतकर प्रदेश और देश का नाम रोशन किया। यामिनी मौर्य पिछले 18 वर्षों से जूडो में मेहनत कर रही हैं। वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अब तक 26 से अधिक स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं। उनके पिता एक छोटे किसान होने के साथ-साथ बीमा एजेंट भी हैं।
यामिनी मौर्य की तीन बहनें और एक भाई हैं। स्कूल से शुरू हुए इस खेल में यामिनी ने महज तीन महीने में ही स्टेट चैंपियन बनकर पहला स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया था।
हालांकि, कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में रजत पदक दिलाने वाली सागर की यामिनी मौर्य का सफर आसान नहीं रहा। हार न मानने की उनकी जिद ने उन्हें हर मुश्किल में जीत दिलाई। क्योंकि साल 2017 में एक प्रतियोगिता के दौरान यामिनी का पैर टूट गया। ऑपरेशन के कारण उन्हें लगभग एक वर्ष तक खेल से दूर रहना पड़ा। अधिकांश खिलाड़ी ऐसी चोट के बाद हिम्मत हार जाते हैं, लेकिन यामिनी ने दोबारा अभ्यास शुरू किया और लगातार चार वर्षों तक कड़ी मेहनत कर शानदार वापसी की।