41 सालों तक देश सेवा, CRPF के जाबाज़ जवान ने बताये कठिन अनुभव, अब युवाओं को देंगे ट्रेनिंग
41 सालों तक देश की सेवा की, नक्सल प्रभावित जंगल और कठिन इलाकों में अपनी बहादुरी दिखाई। कई चुनौतियों का डटकर सामना किया। जंगल में नक्सलियों को ढेर करने के दौरान खाना पीना तक नसीब नहीं हुआ लेकिन हार नहीं मानी और अब CRPF के ये जवान सेवानिवृत्त होकर युवाओं को ट्रेनिंग देंगे। हम बात कर रहे हैं एमपी के रीवा जिले की, जहां स्टेशन पहुंचने पर जवान राजबहोर द्विवेदी का खुद डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने उनका सम्मान किया।
राजबहोर द्विवेदी ने अपने कई अनुभव साझा किये। कैसे उन्होंने आतंकवाद से जूझते पंजाब से लेकर नक्सल प्रभावित जंगलों तक अपनी बहादुरी का लोहा मनवाया। अब उन्होंने तय किया है की रीवा और विंध्य के युवाओं में अनुशासन, राष्ट्रभक्ति और सेना में भर्ती होने का जज्बा जगाना है। अब वह इस जिम्मेदारी को निभाएंगे। बता दें की सीआरपीएफ में 41 सालों तक सेवा देने के बाद राजबहोर द्विवेदी अपने गृह जिले रीवा लौटे। जहां उनका सम्मान किया गया। डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने उन्हें शॉल और श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया। वहीं उनकी सेवाओं को राष्ट्र के लिए गौरवपूर्ण बताया।
राजबहोर द्विवेदी बताते हैं की 90 के दशक में जब पंजाब आतंकवाद की आग में जल रहा था। तब उन्होंने सीआरपीएफ के जवान के रूप में आतंकियों का डटकर सामना किया। इसके बाद देश के कई नक्सल प्रभावित इलाकों में भी उन्होंने कई बड़े ऑपरेशन का हिस्सा बनकर उग्रवादियों के खिलाफ अभियान चलाया। उनकी टीम को नक्सलियों को पकड़ने घने जंगलों में लगातार कई दिनों तक डटे रहना पड़ा। ऐसे में भोजन और पानी तक उपलब्ध नहीं था, लेकिन जवानों का हौसला नहीं टूटा। लगातार दबाव और घेराबंदी के चलते कई नक्सलियों ने आखिरकार आत्मसमर्पण कर दिया।
राजबहोर द्विवेदी कहते हैं की सेना का जीवन केवल नौकरी नहीं, बल्कि राष्ट्रसेवा का सबसे बड़ा माध्यम है। अब सेवानिवृत्ति के बाद उनका लक्ष्य युवाओं को अनुशासन, फिटनेस और देशसेवा के प्रति प्रेरित करना है। ताकि ज्यादा से ज्यादा युवा सेना और अर्धसैनिक बलों में भर्ती होकर देश की सुरक्षा में अपना योगदान दे सकें।------