Sagar-बाइक से अस्पताल पहुंचीं गर्भवती, मरीजों को नहीं मिल रही समय पर मदद, बीना में बदहाल 108 एम्बुलेंस सेवा !
सरकार भले ही हर जरूरतमंद मरीज तक समय पर 108 एम्बुलेंस पहुंचाने का दावा करती हो, लेकिन सागर जिले के बीना में यह व्यवस्था सवालों के घेरे में है। बीना, खुरई और मालथौन ब्लॉक में कुल 17 एम्बुलेंस संचालित होने के बावजूद कई मरीजों को समय पर एम्बुलेंस नहीं मिल रही। हालत यह है कि गंभीर मरीजों और गर्भवती महिलाओं को निजी वाहनों और बाइक के सहारे अस्पताल पहुंचना पड़ रहा है।
बीना के पास रामसागर गांव निवासी लखन अहिरवार ने बताया कि उनकी पत्नी अनुष्का अहिरवार को प्रसव पीड़ा शुरू होने पर उन्होंने कई बार 108 एम्बुलेंस सेवा पर कॉल किया, लेकिन काफी इंतजार के बाद भी एम्बुलेंस नहीं पहुंची। आखिरकार मजबूरी में उन्होंने गर्भवती पत्नी को बाइक पर बैठाकर बीना सिविल अस्पताल पहुंचाया, जहां सुरक्षित प्रसव हुआ और महिला ने एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया।
जानकारी के अनुसार, बीना सिविल अस्पताल से जुलाई माह में 152 गंभीर मरीजों को जिला अस्पताल सागर रेफर किया गया। इनमें से 63 मरीजों को एम्बुलेंस नहीं मिलने के कारण निजी वाहनों से सागर जाना पड़ा। इससे मरीजों और उनके परिजनों को आर्थिक और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि बीना की 108 एम्बुलेंस जब किसी मरीज को लेकर सागर जाती है, तो वहां से उसे भोपाल, रायसेन, विदिशा जैसे अन्य जिलों के मामलों में भेज दिया जाता है। इस कारण स्थानीय क्षेत्र में एम्बुलेंस की उपलब्धता कम हो जाती है और जरूरतमंद मरीज घंटों इंतजार करते रह जाते हैं।
बीना रेलवे जंक्शन होने के कारण यहां हर समय दुर्घटना और आपातकालीन स्थितियों की आशंका बनी रहती है। ऐसे में समय पर एम्बुलेंस उपलब्ध न होना गंभीर चिंता का विषय बन गया है। विधायक निर्मला सप्रे ने कहा कि उन्हें स्थानीय एम्बुलेंस को अन्य जिलों में भेजे जाने की जानकारी मिली है। वह इस मामले में स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा करेंगी। उन्होंने कहा कि यदि मरीजों को एम्बुलेंस नहीं मिलने से कोई परेशानी होती है, तो इसकी जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग की होगी। अब बड़ा सवाल यह है कि जब सरकार की जीवनरक्षक 108 सेवा ही समय पर मरीजों तक नहीं पहुंच पा रही, तो आम लोगों को आपातकालीन स्थिति में आखिर किसके भरोसे रहना होगा?