जीवित बेटी का अंतिम संस्कार, परिवार ने निभाई सारी रस्में, परिवार में ही प्रेम विवाह से नाराज़ परिवार
कितना अजीब लगता है न ये सुनकर बेटी ज़िंदा है लेकिन फिर भी उसे मरा हुआ मान लिया गया हो और उसका अंतिम संस्कार भी कर दिया गया हो। परिवार वालों ने तस्वीर जलाकर प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार किया। क्योंकि मामला प्रेम प्रसंग का है। बेटी ने समाज और परिवार के खिलाफ जाकर परिवार के ही युवक से शादी कर ली। और तो और परिजनों को ही पहचनानने से इंकार कर दिया। ये मामला भी उज्जैन जिले के खाचरौद क्षेत्र से ही सामने आया है। ये ठीक उसी तरह की घटना है जो बीते दिनों खाचरौद क्षेत्र से ही सामने आई थी। वहां भी बेटी के प्रेम विवाह पर परिवार ने उसका प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार किया था। बेटी के अचानक इस फैसले ने सभी को हैरान कर दिया। ये सब उस समय हुआ जब परिजन उसके रिश्ते के लिए लिए लड़के की तलाश कर रहे थे।
बताया गया की खाचरोद के बड़ागांव में लव मैरिज से नाराज़ एक परिवार ने समाज के लोगों की मौजूदगी में अपनी ही जीवित बेटी स्वास्ति पाटीदार की तस्वीर का प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार किया। परिवार ने पाटीदार धर्मशाला मे परंपराओं के अनुसार गोरनी कार्यक्रम का भी आयोजन किया। इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। कई लोग इसे परिवार की नाराज़गी और सामाजिक परंपराओं से जोड़कर देख रहे हैं। जबकि कुछ लोग इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता और पारिवारिक रिश्तों के बीच टकराव का उदाहरण मान रहे हैं।
यहां गौर करने वाली बात ये है की खाचरोद तहसील से प्रेम विवाह के चलते ये दूसरा मामला सामने आया है जहां जीवित बेटी को परिवार ने मृत घोषित कर दिया और सारी रस्म भी अदा कर दी। युवती के पिता हरिशंकर पाटीदार ने बताया की उन्होंने बेटी का पालन-पोषण बड़े स्नेह और संघर्ष के साथ किया था। लेकिन प्रेम विवाह के बाद परिवार और बेटी के रिश्ते पूरी तरह टूट गए। उनका आरोप है कि थाने में भी बेटी ने अपने माता-पिता और भाई-बहनों को पहचानने से इनकार कर दिया। जिससे उन्हें गहरा मानसिक आघात पहुंचा है। सूचना मिलने के बाद समाज के कई लोग पहुंचे और परिवार केप्रति शोक संवेदनाएं व्यक्त की। एडवोकेट उमाशंकर पाटीदार ने कहा की जीवित बेटी का क्रिया कर्म करना एक बहुत ही दुखद है। लेकिन माता-पिता ने लड़की को अपनी पीड़ा झेल कर पढ़ा लिखा कर बड़ा किया। लेकिन बेटी ने अपने ही परिवार मे प्रेम विवाह कर लिया।-