हितग्राहियों का फूटा गुस्सा, दुकान पर ताला, 4 महीने का राशन गायब! जिम्मेदारों पर भ्रष्टाचार के आरोप
छतरपुर जिले के बकस्वाहा विकासखंड की निमानी ग्राम पंचायत से सार्वजनिक वितरण प्रणाली में बड़ी गड़बड़ी का मामला सामने आया है। आरोप है कि पिछले चार महीनों से गरीब हितग्राहियों को राशन नहीं मिला, जबकि रिकॉर्ड में वितरण दिखाया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि जिम्मेदारों ने गरीबों के हक पर डाका डाल दिया है। अब पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग तेज हो गई है। निमानी गांव की राशन दुकान पिछले चार महीनों से बंद पड़ी है। दुकान पर ताला लटका है, लेकिन हितग्राहियों के अनुसार गांव-गांव जाकर लोगों के अंगूठे ई-पॉस मशीन पर लगवाए गए। आरोप है कि अंगूठे तो लगवा लिए गए, लेकिन बदले में राशन नहीं दिया गया। कई लोगों को सिर्फ पर्चियां थमा दी गईं, जबकि खाद्यान्न का कहीं कोई अता-पता नहीं है।
ग्रामीणों का कहना है कि राशन नहीं मिलने से गरीब परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि राशन का वितरण नहीं हुआ, तो सरकारी रिकॉर्ड में वितरण कैसे दर्ज हो गया? आखिर चार महीने का राशन गया कहां? हितग्राहियों ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने राशन की मांग की तो उन्हें यह कहकर लौटा दिया गया कि राशन उपलब्ध नहीं है। इससे ग्रामीणों में भारी नाराजगी है और वे पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग कर रहे हैं।
वहीं, फूड इंस्पेक्टर सुगंध जैन ने स्वीकार किया कि निमानी राशन दुकान को लेकर शिकायतें मिली हैं। उन्होंने बताया कि चार महीने से राशन वितरण नहीं होने की जानकारी अनुविभागीय अधिकारी को भेज दी गई है। अब सभी की नजर प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला गरीबों के हक पर बड़े भ्रष्टाचार का उदाहरण साबित हो सकता है।