Sagar- मानसून में सागर का स्वर्ग, बादलों की गोद में बसा रोमांचक ‘हनुमान टोंग | SAGAR TV NEWS |
बारिश की फुहारें, घने जंगलों पर बिछी हरियाली की चादर, धसान नदी की कल-कल करती धारा और बादलों से बातें करती ऊंची पहाड़ियां... अगर आप मानसून में प्रकृति के सबसे रोमांचक रूप का अनुभव करना चाहते हैं, तो सागर जिले का हनुमान टोंग आपके लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं है।
सागर शहर से करीब 55 किलोमीटर दूर बंडा और बरायठा के बीच घने जंगलों में बसा यह अनोखा स्थल रोमांच, आस्था और प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत संगम है। मानसून के मौसम में यहां का हर दृश्य मानो किसी चित्रकार की खूबसूरत कल्पना को साकार कर देता है। दूर-दूर तक फैली हरियाली, रंग-बिरंगे पक्षियों की मधुर चहचहाहट, पेड़ों से टपकती बारिश की बूंदें और धसान नदी का निर्मल प्रवाह मन को सुकून और ऊर्जा से भर देता है।
लेकिन हनुमान टोंग की खूबसूरती जितनी आकर्षक है, यहां तक पहुंचने का सफर उतना ही चुनौतीपूर्ण भी है। मुख्य सड़क से कच्चे और दुर्गम जंगल के रास्तों से गुजरना पड़ता है। बरसात में छोटे-छोटे नाले और फिसलन भरे मार्ग इस यात्रा को और भी रोमांचक बना देते हैं। इसके बाद शुरू होती है लगभग 1000 फीट ऊंचे पहाड़ की कठिन चढ़ाई, जहां कई जगह पत्थरों को पकड़कर और लोहे की जंजीरों का सहारा लेकर ऊपर पहुंचना पड़ता है। यह सफर हिम्मत, धैर्य और रोमांच का असली इम्तिहान है।
हालांकि, जब आप पहाड़ी की चोटी पर पहुंचते हैं, तो सामने खुलता है बादलों से घिरा मनमोहक नजारा, शुद्ध हवा का अहसास और प्रकृति की अनुपम छटा। यहां खड़े होकर ऐसा लगता है मानो धरती और आसमान एक-दूसरे से गले मिल रहे हों। सारी थकान पल भर में गायब हो जाती है।
हनुमान टोंग केवल रोमांच का केंद्र नहीं, बल्कि गहरी आस्था का भी प्रतीक है। स्थानीय मान्यता है कि धसान नदी में आई भीषण बाढ़ को हनुमान जी ने अपने पैर यानी टोंग से रोकने का प्रयास किया था, तभी से इस स्थान का नाम हनुमान टोंग पड़ा। वहीं एक अन्य किंवदंती के अनुसार, मुगल सम्राट औरंगजेब पर विजय प्राप्त करने के बाद वीर योद्धा महाराजा छत्रसाल ने इसी स्थान पर आकर पूजा-अर्चना की थी।
इस स्थल की खोज की कहानी भी बेहद रोचक है। कहा जाता है कि वर्षों पहले शहद की तलाश में एक युवक इस दुर्गम पहाड़ी पर चढ़ा और उसे यहां हनुमान जी का प्राचीन स्थान मिला।