Sagar- बच गई 200 साल की छाया-सुनहरी यादें, बच गया अस्तित्व और कचहरी का मान,पेड़ को मिला नया जीवन
200 साल की छाया थी, कचहरी का मान था। सड़क की भेंट चढ़ा तो, सबका दिल हैरान था। जी हां ये सिर्फ बात ही नहीं, जज़्बात भी है सुनहरी यादें भी हैं ये उस पेड़ की कहानी है जिस पर संकट मंडरा रहा था की क्या कचहरी में मौजूद इस पेड़ का अस्तित्व ख़त्म हो जायेगा। तस्वीरें सागर के बंडा की हैं जहां जिम्मेदार लोगों ने करीब दो सौ साल पुराने एक बरगद के पेड़ को नई ज़िंदगी दी है।
दरअसल सड़क चौड़ीकरण के दौरान उखाड़े गए वट वृक्ष को अब शमसान में लगाया गया है। अब लोग प्रार्थना कर रहे हैं की यहां पर भी ये वैसे ही लहराए जैसे पहले लहराता था। इसे बचाने लोगों ने काफी प्रयास किये और जब इसे दोबारा से वापिस लगाया गया तो लोगों की ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं था। पेड़ को बचाने में कई प्रकृति प्रेमी लोगों ने अहम योगदान दिया।
जानकारी के मुताबिक बंडा नगर में सड़क चौड़ीकरण के दौरान करीब 200 साल पुराने बरगद के वृक्ष को उखाड़ा गया था। इस पेड़ से कई पीढ़ियों की यादें जुड़ी हुई हैं। कहा जाता है की ये सिर्फ एक पेड़ नहीं बल्कि कचहरी की पहचान और पीढ़ियों की यादों का प्रतीक है। जिसे बचाने का सराहनीय प्रयास किया गया। इस वट वृक्ष को नष्ट होने से बचाने में वकील हरिओम चतुर्वेदी ने पहल की और इसे शमशान घाट में फिर से रोपित करवाया।
वहीं इस काम में नगर परिषद अध्यक्ष वैभवराज सिंह कुकरेले, भाजपा नगर मंडल उपाध्यक्ष अभी कटारे, मुकेश कलरैया, पार्षद रफीक सिद्दीकी, जमील खान, मुहीव खान, मानवेन्द्र विश्वकर्मा समेत कई अन्य लोगों का सहयोग रहा। सड़क चौड़ीकरण के दौरान लोगों ने सोचा की शायद इस पेड़ की यादें अब मिट जाएंगी। लेकिन सभी के सहयोग से अब इसे रोपित कराया गया है।-