Sagar - सागर से गुजरा यह हाईवे यात्रियों को क्यों बन रहा काल, 6 साल में हो चुकी रिकॉर्ड मौतें
सड़क हादसों में मौतों के मामले में प्रदेश के टॉप 5 जिलों में सागर दूसरे पायदान पर है। लिहाजा, हादसों की वजह बन रहे ब्लैक स्पॉटों को खोजा जा रहा है। फोरलेन पर ऐसे 47 ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए गए हैं, जहां हादसे हो सकते हैं। कहीं पेट्रोल पंप, कहीं होटल, ढाबा, रेस्टोरेंट तो कहीं खेत या गांव तक जल्द पहुंचने के लिए मौत के ये शॉर्ट कट (रास्ते) लोगों ने खुद बनाए हैं। डिवाइडर को भी जहां-तहां से तोड़ा गया है।
जिले में होने वाले सड़क हादसों में फोरलेन पर होने वाली दुर्घटनाओं में मौतों का अनुपात ज्यादा है। इसकी वजह यहां तेज रफ्तार से आने-जाने वाले भारी वाहन हैं। जब इनसे कोई चार या दो पहिया वाहन अचानक से टकराते हैं तो हादसा बेहद भयावह होता है। इन अवैध कट को बंद कराने और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की तैयारी चल रही है।
जिले में सालाना 550 से ज्यादा मौतें सड़क हादसों में हो रही हैं। सागर से होकर गुजरने वाले नेशनल व स्टेट हाईवे पर आए दिन हादसे हो रहे हैं। इनमें मौतों की संख्या सर्वाधिक है। इन मार्गों पर भारी वाहनों की अंधी रफ्तार के बीच पैदल, बाइक व कार से अचानक रोड क्रॉसिंग के कारण हादसे हो रहे
कश्मीर से कन्याकुमारी को जोड़ने वाले देश के इस सबसे लंबे राष्ट्रीय राजमार्ग-44 का 152 किलोमीटर का हिस्सा सागर जिले की सीमा में आता है। यह मालथौन के पास से शुरू होकर देवरी के आगे नरसिंहपुर जिले की सीमा में आने वाले तीतरपानी टोल प्लाजा तक लगता है। ललितपुर से लखनादौन फोरलेन पर हादसों को रोकने और आसपास के गांवों के लोगों की सहूलियत के हिसाब से 14 अंडरपास बनाए जा रहे हैं। इनका काम अंतिम चरण में है। ज्यादातर अंडरपास से आवागमन शुरू हो चुका है, इसके बावजूद फोरलेन पर अवैध रास्ते बने हुए हैं।
जिले के ब्लैक स्पॉट में सबसे ज्यादा खतरनाक जिले की निवार घाटी, गौरझामर की नीमघाटी व बांदरी की झींकनी घाटी है। इसके अलावा गढ़पहरा, बाछलोन व बम्होरी तिराहा के आसपास हादसे हो रहे हैं। बाछलोन व बम्होरी तिराहा पर अंडरपास से आवागमन शुरू हो चुका है। बरोदिया चौराहा, झौंकनी तिराहा, मोठी, सुरखी, गौरझामर-केसली चौराहा, देवरी बायपास, देवरी-दमोह तिराहा, महाराजपुर तिराहा पर अंडरपास बनाए जा रहे हैं।