पहली बारिश में निर्माण की खुली पोल, जांच के आदेश, ₹1.18 करोड़ के स्कूल भवन पर भ्रष्टाचार के आरोप!
एमपी के सागर संभाग के छतरपुर जिले के बकस्वाहा क्षेत्र की ग्राम पंचायत निमानी से सरकारी निर्माण की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। यहां करीब 1 करोड़ 18 लाख रुपये की लागत से निर्माणाधीन स्कूल भवन की कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं। तस्वीरों के सामने आने के बाद स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने निर्माण कार्य में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि करोड़ों रुपये की लागत से बन रहे इस भवन की गुणवत्ता पहली ही बारिश में सवालों के घेरे में आ गई है। निर्माण स्थल की तस्वीरों को लेकर दावा किया जा रहा है कि भवन में जगह-जगह निर्माण संबंधी समस्याएं दिखाई दे रही हैं। हालांकि, वायरल तस्वीरों में सामने आए आरोपों की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
स्थानीय लोगों ने निर्माण कार्य में उपयोग की जा रही सामग्री की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों के आरोप हैं कि निर्माण में मिट्टी युक्त रेत, घटिया गुणवत्ता की ईंट और निर्धारित मापदंडों से अलग सरिया इस्तेमाल किए जाने की आशंका है। साथ ही निर्माण स्थल पर जिम्मेदार अधिकारियों की नियमित निगरानी नहीं होने का भी आरोप लगाया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि सरकारी भवन के निर्माण में गुणवत्ता से समझौता किया गया है, तो इसका सीधा असर भविष्य में यहां पढ़ने वाले विद्यार्थियों की सुरक्षा पर पड़ सकता है। ऐसे में निर्माण कार्य की निष्पक्ष तकनीकी जांच जरूरी है।
मामला सामने आने के बाद अब कई सवाल खड़े हो रहे हैं—क्या निर्माण कार्य निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुसार किया जा रहा है? क्या निर्माण सामग्री की जांच कराई जाएगी? और अगर जांच में अनियमितताएं सामने आती हैं, तो जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई होगी? मामले को लेकर छतरपुर जिला शिक्षा अधिकारी पी.के. रैकवार का कहना है कि प्रकरण उनके संज्ञान में आया है। उन्होंने बताया कि मामले की जांच के लिए टीम गठित की जाएगी और यदि जांच में अनियमितताएं पाई जाती हैं तो नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
वहीं, स्थानीय सरपंच जगदीश यादव ने भी मामले को लेकर अपनी बात रखी है। फिलहाल सबकी नजर जांच टीम की रिपोर्ट पर है। जांच के बाद ही साफ होगा कि वायरल तस्वीरों और ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है। अब सवाल यही—क्या ₹1.18 करोड़ के इस स्कूल भवन की गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच होगी और दोषी पाए जाने पर जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी?