Sagar - बेलपत्र चढ़ाते ही पानी में समा जाता है ! दावा-सीधा शिवलिंग तक पहुंचती है पूजा
सागर जिले में एक ऐसा धार्मिक और रहस्यमयी स्थान है, जहां पानी के कुंड में बेलपत्र चढ़ाने को लेकर ऐसी मान्यता है, जिसे सुनकर हर कोई हैरान रह जाता है। दावा किया जाता है कि यहां पानी में बेलपत्र अर्पित करने पर वह तैरता नहीं, बल्कि सीधे पानी के अंदर चला जाता है। स्थानीय लोगों की मान्यता है कि यह बेलपत्र जल के भीतर मौजूद भगवान भोलेनाथ के शिवलिंग तक पहुंचता है। यह सिद्ध स्थान सागर जिला मुख्यालय से करीब 47 किलोमीटर और राहतगढ़ से लगभग 7 किलोमीटर दूर बीना नदी के तट पर स्थित है। इस स्थान का प्राचीन नाम गिरजा दहार बताया जाता है। मान्यता है कि ‘गिरजा’ यानी माता पार्वती ने यहां भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए तपस्या की थी। समय के साथ यह स्थान गुर्जा दहार के नाम से भी जाना जाने लगा।
स्थानीय लोगों के अनुसार, यहां बेलपत्र के अलावा दूसरे पत्ते या वस्तुएं पानी में डालने पर तैरती रहती हैं, जबकि बेलपत्र पानी में डूब जाता है। दूध अर्पित करने पर दूध की धारा भी पानी के भीतर जाने की बात कही जाती है। हालांकि इन मान्यताओं की स्वतंत्र वैज्ञानिक पुष्टि नहीं हुई है। इस स्थान को लेकर संत साहिब जी की तपस्या की कथाएं भी प्रचलित हैं। कहा जाता है कि उन्होंने यहां वर्षों तक साधना की और नदी के पानी से घी के स्थान पर पूरी निकालकर भंडारा कराया। स्थानीय लोगों के अनुसार नदी में मगरमच्छ होने के बावजूद किसी इंसान या जीव-जंतु को नुकसान नहीं पहुंचा।
पंडित विनोद बिहारी शास्त्री देवलिया सरकार के मुताबिक, वर्ष 2013 में कथा के दौरान उन्हें स्वप्न में इस स्थान के जल के भीतर शिवलिंग मंदिर होने की अनुभूति हुई थी। उनका कहना है कि देश में ऐसे दो स्थान बताए जाते हैं, जहां बेलपत्र पानी में डालने पर सीधे नीचे चला जाता है—एक उत्तर प्रदेश के नैमिषारण्य क्षेत्र में और दूसरा सागर जिले का गिरजा दहार। आज भी यहां श्रद्धालु सालभर पहुंचते हैं और इस अनोखी मान्यता से जुड़े दर्शन कर इसे अपने लिए आस्था और आध्यात्मिक अनुभव का केंद्र मानते हैं।