सागर के बटरे का ऐसा जादू, 40 KM दूर से खिंचे चले आते हैं लोग! | SAGAR TV NEWS |
सागर की पहचान सिर्फ अपनी संस्कृति और ऐतिहासिक विरासत से नहीं, बल्कि यहां के लजीज और देसी खान-पान से भी है। खासकर बारिश का मौसम आते ही शहर की गलियों और बाजारों में एक ऐसा स्वाद दस्तक देता है, जिसका इंतजार खाने के शौकीनों को पूरे साल रहता है। यह है गरमा-गरम मसालेदार बटरा।
सागर में बटरा कोई आम स्ट्रीट फूड नहीं, बल्कि मानसून की खास पहचान बन चुका है। इसकी खासियत यह है कि यह स्वाद सालभर नहीं मिलता। बारिश शुरू होते ही बटरे के ठेले सज जाते हैं और करीब दो से तीन महीने तक लोगों की जुबान पर इसका स्वाद बना रहता है। जैसे ही मानसून विदा होता है, वैसे ही बटरे के ठेले भी गायब हो जाते हैं।
सागर के बड़ा बाजार में मिश्रीलाल साहू पिछले करीब 20 साल से बटरा बेच रहे हैं। उनका ठेला दोपहर 12 बजे से शाम तक गुलजार रहता है, लेकिन बटरे के स्वाद का राज सुबह 5 बजे से शुरू होने वाली तैयारी में छिपा है। मिश्रीलाल घर पर ही नमक और तमाम मसाले तैयार करते हैं। उनका मानना है कि शुद्ध और असली सामग्री ही बटरे को वह खास स्वाद देती है, जिसके लिए ग्राहक बार-बार लौटकर आते हैं।
इस स्वाद के दीवाने सिर्फ सागर शहर में ही नहीं, बल्कि दूर-दराज के इलाकों में भी हैं। राहतगढ़ से आने वाले रामू सेन पिछले तीन साल से यहां बटरा खा रहे हैं। उनका कहना है कि बारिश शुरू होते ही वे करीब 40 किलोमीटर का सफर तय कर सिर्फ साहूजी का बटरा खाने पहुंच जाते हैं।
वहीं, बड़ा बाजार के शिवांक व्यास पिछले दो साल से यहां बटरा खाने आ रहे हैं और परिवार के लिए पैक करवाकर भी ले जाते हैं। जबकि हेमंत साहू 12 साल से इसके ग्राहक हैं। उनके मुताबिक, घर के मसालों से तैयार गरमा-गरम बटरा और टेसू के पत्तों में परोसने का अंदाज—इस स्वाद को खास बना देता है।
यही वजह है कि सागर का यह देसी स्वाद बारिश के साथ आता है और मौसम बीतते ही यादों में बस जाता है।