Sagar- झील किनारे खड़ा 400 साल पुराना गवाह! कैसे एक किले ने बसाया पूरा सागर शहर, जो 15 अगस्त को खुलेगा
सागर शहर एक 400 साल पुराने किले के आसपास बसा है. 1660 में बने इस किले ने शहर की नींव रखी. आज ये किला साल में सिर्फ 15 अगस्त और 26 जनवरी को आम लोगों के लिए खोला जाता है. झील के किनारे स्थित सागर किला शहर के गौरवशाली इतिहास और बुंदेलखंड की समृद्ध विरासत का जीवंत प्रतीक है। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर 15 अगस्त के दिन शहरवासी सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक, इस ऐतिहासिक धरोहर का दीदार कर सकेंगे।
सागर किले का निर्माण वर्ष 1660 में निहाल शाह के वंशज उदान शाह द्वारा कराया गया था। इस किले को हरी-भरी पहाड़ी और शांत झील के पास बनाया गया था. उस समय पानी प्राकृतिक सुरक्षा कवच का काम करता था, जिससे दुश्मनों के लिए सीधा हमला करना मुश्किल हो जाता था. व्यापारिक मार्गों और सुरक्षा को ध्यान में रखकर इसे मजबूत दीवारों और परकोटे के साथ तैयार किया गया था. किले के बाहर बसाई गई परकोटा बस्ती धीरे-धीरे बढ़ती गई और आज वही इलाका शहर के बीचों-बीच है. इसी बस्ती ने सागर शहर की असली शुरुआत की. 1733 में बुंदेला शासकों ने किले को मराठाओं को सौंप दिया. बाद में मराठा सूबेदार गोविंद पंथ खैर ने नए सागर शहर को व्यवस्थित रूप दिया और विकास की नींव रखी, 1818 में ब्रिटिश सेना ने इस किले पर अधिकार कर लिया। 1906 में यहां पुलिस प्रशिक्षण की शुरुआत हुई, जिससे ये प्रशासनिक नजरिए से भी महत्वपूर्ण केंद्र बन गया 1857 की क्रांति से पहले यहां बुंदेला विद्रोह हुआ था. क्रांतिकारियों ने अंग्रेजों को लंबे समय तक बंधक बनाए रखा. ये किला आज भी उस संघर्ष की कहानी सुनाता है.
सागर किला अपनी स्थापत्य विरासत, इतिहास और गौरवशाली अतीत के कारण शहर की अनमोल धरोहर है। स्वतंत्रता दिवस पर इसके द्वार खुलना लोगों के लिए केवल पर्यटन का अवसर नहीं, बल्कि अपनी ऐतिहासिक विरासत को करीब से जानने और महसूस करने का खास मौका भी होगा