Sagar- मंत्री दरवार में समस्या लेकर आते हैं और अपनापन और समाधान लेकर लौटते हैं !
बुंदेलखंड की पहचान सिर्फ उसकी मिट्टी और संस्कृति से नहीं, बल्कि यहां की आत्मीय मेहमाननवाजी से भी है। सागर में मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के निज निवास ‘मातेश्वरी’ में लगने वाला जनता दरबार इन दिनों इसी वजह से चर्चा में है। यहां लोग अपनी समस्याएं लेकर पहुंचते हैं, लेकिन लौटते वक्त साथ लेकर जाते हैं सम्मान, अपनापन और समाधान की उम्मीद। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के मातेश्वरी स्थित निज निवास पर प्रत्येक सोमवार और गुरुवार जनता दरबार आयोजित होता है। इसमें केवल सुरखी विधानसभा क्षेत्र के लोग ही नहीं, बल्कि सागर जिले और प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से लोग अपनी समस्याएं लेकर पहुंचते हैं।
जनता दरबार में मंत्री गोविंद सिंह राजपूत लोगों की समस्याएं सुनते हैं और संबंधित अधिकारियों को उनके निराकरण के लिए आवश्यक निर्देश दिए जाते हैं। लेकिन इस जनसुनवाई की चर्चा सिर्फ समस्याओं के समाधान तक सीमित नहीं है। मातेश्वरी पहुंचने वाले हर आगंतुक के स्वागत-सत्कार के लिए विशेष व्यवस्था की जाती है। बुंदेलखंड की परंपरा अतिथि देवो भव की भावना के साथ लोगों का स्वागत किया जाता है। यहां आने वाले लोगों को सम्मान देना और उनसे आत्मीयता के साथ संवाद करना इस जनता दरबार की अलग पहचान बनता जा रहा है।
मातेश्वरी में होने वाली इस जनसुनवाई की खास बात यह भी बताई जा रही है कि यहां अतिथि के सम्मान को राजनीतिक सीमाओं से ऊपर रखा जाता है। आने वाले व्यक्ति की पार्टी, क्षेत्र या विचारधारा से ज्यादा महत्व उसकी समस्या और सम्मान को दिया जाता है। बुंदेलखंड में घर आए मेहमान के सत्कार की पुरानी परंपरा रही है। इसी संस्कृति की झलक मातेश्वरी के जनता दरबार में दिखाई देती है। लोग यहां अपनी समस्या लेकर पहुंचते हैं और मंत्री से सीधे संवाद करते हैं।
अधिकारियों को निर्देश दिए जाने के साथ ही आगंतुकों के लिए स्वागत-सत्कार की व्यवस्था उन्हें अपनेपन का अहसास कराती है। यही वजह है कि मातेश्वरी की मेहमाननवाजी अब चर्चा का विषय बन रही है। जनता से संवाद, समस्या का समाधान और हर आगंतुक का सम्मान—इन्हीं तीन बातों के मेल से मातेश्वरी का जनता दरबार अपनी अलग पहचान बनाता नजर आ रहा है।