MP में सरकारी बसों की वापसी से मची हलचल,निजी ऑपरेटरों की मनमानी पर ब्रेक? यात्रियों में खुशी की लहर
मध्य प्रदेश में सरकारी बसों की सड़कों पर वापसी ने परिवहन व्यवस्था में नई बहस छेड़ दी है। मध्य प्रदेश सरकार के इस फैसले से जहां आम यात्रियों में खुशी की लहर है, वहीं निजी बस संचालकों में हड़कंप मचा हुआ है।
दरअसल, लंबे समय से प्रदेश में अधिकतर रूटों पर निजी बस ऑपरेटरों का दबदबा रहा है। यात्रियों की शिकायत रही है कि कई रूटों पर मनमाना किराया वसूला जाता है, बसों का रखरखाव ठीक नहीं होता और समय सारणी का पालन भी नहीं किया जाता। कई जगहों पर जर्जर बसों के संचालन से सुरक्षा पर भी सवाल उठते रहे हैं।
अब सरकार के फैसले के बाद तस्वीर बदलने की उम्मीद जताई जा रही है। सरकारी बस सेवा शुरू होने से किराए पर नियंत्रण संभव होगा, जिससे यात्रियों की जेब पर बोझ कम पड़ेगा। साथ ही आधुनिक और सुरक्षित बसों के संचालन पर जोर दिए जाने की बात कही जा रही है, ताकि दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सके।
परिवहन विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी हस्तक्षेप से टिकट व्यवस्था, समयबद्ध संचालन और जवाबदेही सुनिश्चित हो सकती है। इससे निजी क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा भी बढ़ेगी और सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने का दबाव बनेगा।
हालांकि निजी बस संचालक इस फैसले का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि इससे उनके व्यवसाय पर असर पड़ेगा। लेकिन आम यात्रियों का मानना है कि यदि उन्हें सस्ता, सुरक्षित और सम्मानजनक सफर मिलता है तो यह कदम स्वागतयोग्य है।
अब देखना होगा कि सरकार इस नई व्यवस्था को किस तरह लागू करती है और क्या वाकई इससे निजी ऑपरेटरों की कथित मनमानी पर लगाम लग पाती है। फिलहाल प्रदेश की सड़कों पर सरकारी बसों की वापसी ने परिवहन व्यवस्था में बड़ा बदलाव संकेत दे दिया है।